छोटे छोटे सपनो वाली वो मीठी पुरवाई है सन्नाटो को चीरती वो मधुर शहनाई है आँचल के कोनो मे सिमटी वो कठिन सिलाई है लोरी की चौपाई से सरकती माँ अंगड़ाई है अंधेरों में रहने वाली वो मेरी परछाईं है बड़े दिनो के बाद याद आज अम्मा की आई है |
कभी थपकी देकर परिलोक की सैर मुझे करती है कभी मुझे खिलाकर खुद भूखा सो जाती है वो तो उजड़े घर मे खिलखिलती फुलवारी है माँ तो हंस कर अंधेरे मे खुद जल जाती है कभी कभी तो मुझे डाँट कर खुद रोने लग जाती है हर रात अकेले सोने से पहले याद अम्मा की आती है |
भीतर भीतर बलके फिर भी रेशम से वो रहती है तिनका तिनका बुनकर यादों की खुश्बू बोती है दुखड़ों की नइया में बैठी वो मुझे हंसाया करती है कभी निर्मल कभी कठोर वो कलकल बहती रहती है |
हर शाम जैसे फीकी पड़ती है मन से बस एक आह निकलती है माँ तू गर पास होती तो रख गोद मे सर बस जब इतना कहती "मेरी लाडो सबसे प्यारी" तो मैं भी आँखे मींझ कर झट से सो जाती माँ दूर देश में याद तेरी बड़ी आती |
कई दिनो से पन्ने बंद थे कलम नहीं चली थी अलमारी में किताबें सजीं थीं , मैं रोज उन्हे देखता मुस्कुराता , फिर उन्हे टोलता और भूल जाता |
पर आदतों का क्या है बदल जाती हैं रह रह कर | खुछ जान बूझ कर और खुछ अनजाने में |
पर शायद इन पन्नो की खुशबू से राहत मिलती है मुझको - कलम चलाने से तसल्ली लिखने से सुखून |
और वैसे भी खुछ आदतें तो जा कर भी नहीं जातीं उनका तो रिश्ता होता है जैसे धड़कनो से बस खुछ यूँ ही है कलम और मेरा रिशता - मैं जा जा कर भी उनको लौट आता हूँ |
मैं कम लिखता हूँ कभी कभी , पर बदलता नहीं - ना मैं ना मेरी आदतें |
आज वो मिले कुछ उखड़े उखड़े से थे कुछ नाराज़गी होगी | पर हमसे? मुमकिन नहीं ! सोचा पूछूँ, पर क्या सोचा जाने दूं, पर कैसे असमंजस में था | खैर जाने दिया अजनाबीयों सा उनको देख कर मुस्कुराया वो भी हिचकिचाए- कैसे हैं आप, और भाभी जी ? अपनापन थोड़ा कम सा था थोड़ी खटास सी थी पर हमसे? क्यूँ भला ? मालूम नहीं |
कुछ पल साथ रहे थे हम, पहले- और अब हम यहाँ उनका ठिकाना नहीं |
बेहतरीन शायरियाँ लिखते थे वो अब नहीं लिखते शायद अब कुछ आम आदमी सा काम करते हैं |
हम भी व्यस्त हैं वो भी | खुश तो हम भी नहीं हैं पर खुश तो कोई भी नहीं है वो भी नहीं |
वक्त है, गुज़र जाएगा ! गुज़रते गुज़रते |
अगली बार शायद वो दिखें तो पहचाने पहचाने से लगें या हो सकता है ना ही दिखें क्या करना | दिखें या ना सुखी रहें| वो भी और हो सके तो हम भी |